रक्षा - तकनीक

आई एन एस विक्रांत 
कोच्चि : देशज तकनीक से निर्मित पहले विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का जलावतरण कर सोमवार को भारत 35,000 टन से ज्यादा वजन वर्ग के युद्धपोत का डिजाइन एवं निर्माण करने की क्षमता रखने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया।

एंटनी ने इस अवसर पर अपने भाषण में कहा, ‘यह समूचे राष्ट्र के लिए एक ऐतिहासिक दिन है और देश के लिए गर्व का एक क्षण है जिसने युद्धपोत डिजाइन एवं विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की है। सिर्फ कुछ ही उन्नत देशों के पास इस तरह के विमानवाहक पोतों के डिजाइन एवं विनिर्माण की क्षमता है।’

रक्षामंत्री ने कहा कि यह देश में युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में लंबे सफर का एक ‘अहम’ कदम है। इस आकार के पोत के डिजाइन एवं निर्माण की क्षमता अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस के पास ही है।

एंटनी ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए नौसेना की क्षमताएं उन्नत की जानी चाहिए कि यह ‘हमारे राष्ट्रीय हितों के खिलाफ किसी संभावित दुस्साहस को नाकाम करने के लिए उच्च संचालनात्मक तैयारी’ बरकरार रखे।

भारत की योजना अपने पूर्वी और पश्चिमी समुद्री क्षेत्रों के लिए कम से कम दो विमानवाहक पोत हासिल करने की है। उसकी योजना देश में और भी विमानवाहक पोत निर्मित करने की है। ये पोत आज जलावतरित किए गए पोत से आकार में बड़े होंगे। आईएनएस विक्रांत के जलावतरण ने उसके निर्माण के पहले चरण के समापन को रेखांकित किया है। अब इसे ‘आउटफिटिंग’ और अधिरचना के निर्माण के लिए फिर से गोदी पर ले जाया जाएगा।
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 पृथ्वी-2 का सफल परीक्षण
भारत ने सोमवार को ओडिशा के एक सैन्य ठिकाने से सतह से सतह वार करने वाली स्वदेश निर्मित और परमाणु क्षमता संपन्न मिसाइल पृथ्वी-2 का सफल परीक्षण किया गया। स्वदेश निर्मित इस बैलिस्टिक मिसाइल की मारक क्षमता 350 किलोमीटर है।
राजधानी भुवनेश्वर से 230 किलोमीटर दूर बालासोर जिले के चांदीपुर में समुद्र में स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से प्रात: 9.20 बजे इसका परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि मिसाइल का परीक्षण भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा नियमित प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में किया गया।
सूत्रों ने कहा, मिसाइल को उत्पादन भंडार से क्रम रहित तरीके से चुना गया था और विशेष रूप से गठित एसएफसी ने इसके प्रक्षेपण संबंधी सारी गतिविधियां की। इसकी निगरानी रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन [डीआरडीओ] ने की है। डीआरडीओ द्वारा विकसित पृथ्वी दो मिसाइल को पहले ही भारतीय सैन्य बलों में शामिल किया जा चुका है।
पृथ्वी दो भारत के प्रतिष्ठित एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम [आईजीएमडीपी] के तहत विकसित की गयी पहली मिसाइल है। यह मिसाइल 500 से 1000 किलोग्राम आयुध ले जाने में सक्षम है। यह तरल ईधन वाले दो इंजनों से संचालित होती है। इसे सही पथ पर ले जाने के लिए एक उन्नत निर्देशित प्रणाली इसमें लगी है। सूत्रों ने बताया कि इससे पहले पृथ्वी दो का परीक्षण 20 दिसंबर 2012 में इसी अड्डे से सफलतापूर्वक किया गया था।
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Boost for Indian defence as nuclear submarine INS Arihant activated

In a major step towards completing its nuclear triad, the atomic reactor on-board the indigenous nuclear submarine INS Arihant was activated late Friday night. The submarine will soon be launched to sea on the Eastern coast and paves the way for its operational deployment by the Navy soon. This will boost the Indian Defence capabilities.
Nuclear triad is the ability to fire nuclear-tipped missiles from land, air and sea. After the nuclear reactor is activated, the agencies concerned can work towards readying the warship for operational deployments soon.
INS Arihant has been undergoing trials at Navy's key submarine base in Vishakhapatnam and would be launched for sea trials soon since the nuclear reactor has gone critical. The DRDO has also readied a medium-range nuclear missile BO-5 for being deployed on the Arihant and its last developmental trial was held on January 27 off the coast of Vishakhapatnam.
The nuclear submarine will help India achieve the capability of going into high seas without the need to surface the vessel for long duration. Conventional diesel-electric submarines have to come up on surface at regular intervals for charging the cells of the vessel.
So far, only the US, Russia, France, China, and the UK have the capability to launch a submarine-based ballistic missile.




















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पिनाका मार्क टू मल्टी बैरेल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम


पिनाका मार्क टू मल्टी बैरेल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का राजस्थान के पोखरन के चंदन इलाके में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। ये ट्रायल शुक्रवार से डीआरडीओ और सेना की निगरानी में शुरू हुए थे। डीआरडीओ के प्रवक्ता रवि गुप्ता के मुताबिक, 'पिनाका मार्क टू के ट्रायल के दौरान फायरिंग प्वॉइंट से 30 किलोमीटर दूर केरू में मौजूद टारगेट को कामयाबी से भेदा गया। डीआरडीओ और सेना के अफसरों ने ट्रायल पर संतोष जाहिर किया है।'
डीआरडीओ के प्रवक्ता ने पिनाका मार्क टू की खासियत के बारे में बताया, 'दुश्मन सेना को तितर बितर करने, उसके कम्युनिकेशन सेंटर, गन और रॉकेट से जुड़े ठिकानों को तबाह करने वाले पिनाकार मार्क टू का विकास किया गया है।' सेना के प्रवक्ता कर्नल एसडी गोस्वामी ने बताया, 'इसकी तेज प्रतिक्रिया करने की क्षमता और दागने की ऊंची क्षमता सेना को अतिरिक्त लाभ देती है। सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसमें कई तरह के वॉरहेड लगाए जा सकते हैं। यह खासियत इसे दुश्मन के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक बनाती है।'
इस मिसाइल से 40 किलोमीटर के दायरे में एक साथ कई रॉकेट दागे जा सकते हैं। इस सिस्‍टम के तहत एक लॉन्‍चर से 44 सेकेंड में 12 रॉकेट दागे जा सकते हैं। पिनाका को करगिल जंग के दौरान भी इसकी क्ष्‍ामता आंकने के लिए फील्‍ड टेस्टिंग में रखा गया था। 

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भारतीय थल सेना सम्बंधित आंकड़े
कार्यरत सैनिक 1,300,000
आरक्षित सैनिक 1,200,000
प्रादेशिक सेना 200,000**
मुख्य युद्धक टैंक 4500
तोपखाना 12,800
प्रक्षेपास्त्र 100 (अग्नि-1,अग्नि- 2)
क्रूज प्रक्षेपास्त्र ब्रह्मोस
वायुयान 10 स्क्वाड्रन हेलिकॉप्टर
सतह से वायु प्रक्षेपास्त्र 90000
* 300,000 प्रथम पंक्ति ओर 500,000 द्वितीय
पंक्ति के योद्धा सम्मिलित हैं
** 40,000 प्रथम पंक्ति ओर 160,000 द्वितीय
पंक्ति के योद्धा सम्मिलित हैं
आंकड़ेकमीशन प्राप्त अधिकारी
फ़ील्ड मार्शल1
जनरल (यहथलसेना अध्यक्ष का पद है)
लेफ्टिनेंट-जनरल
मेजर-जनरल
ब्रिगेडियर
कर्नल
लेफ्टिनेंट-कर्न ल
मेजर
कप्तान
लेफ्टिनेंट
सेकंड लेफ्टिनेंट2
कनिष्ठ कमीशन प्राप्त अधिकारी (JCOs)
सूबेदार मेजर /मानद कप्तान3
सूबेदार/मानद लेफ्टिनेंट3
सूबेदार मेजर
सूबेदार
नायब सूबेदार
गैर कमीशन प्राप्त अधिकारी (NCOs)
रेजीमेंट हवलदार मेजर2
रेजीमेंट क्वार्टरमास्टर हवलदार मेजर2
कंपनी हवलदार मेजर
कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार मेजर
हवलदार
नायक
लांसनायक
सिपाही




 'निर्भय'
अग्नि-5 और समुद्र के भीतर से बी-05 के संधान की कामयाबी के बाद भारत के रक्षा वैज्ञानिक अब पहली स्वदेशी क्रूज मिसाइल के पहले परीक्षण की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। 'निर्भय' नाम की इस मिसाइल का टेस्ट फायर अगले कुछ हफ्तों में होना है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन [डीआरडीओ] के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक अगले कुछ हफ्तों में मध्यम दूरी की क्रूज मिसाइल 'निर्भय' का परीक्षण कर लिया जाएगा। इस मिसाइल का यह परीक्षण करीब 800 किमी की मारक क्षमता के साथ होगा। अमेरिका की टॉम हॉक मिसाइल का भारतीय जवाब मानी जाने वाली निर्भय मिसाइल ध्वनि से कम गति वाली एक सब-सोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे जल, थल और आकाश में सभी तरह के प्लेटफार्म से हर मौसम में दागा जा सकेगा। इसे तीनों सशस्त्र सेनाओं की जरूरतों के मद्देनजर तैयार किया गया है। इस कार्यक्रम पर बरती जा रही गोपनीयता का ही सबूत है कि डीआरडीओ ने निर्भय की कोई तस्वीर तक जारी नहीं की है।
हालांकि डीआरडीओ सूत्र मानते हैं कि निर्भय का परीक्षण 2012 के अंत में ही कर लिया जाना था, लेकिन परीक्षण में कुछ अधिक पैमानों की जरूरत के मद्देनजर इसे आगे बढ़ा दिया गया। इस कार्यक्रम की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ रक्षा वैज्ञानिक के अनुसार डीआरडीओ की कोशिश कम से कम परीक्षणों में अधिक से अधिक आंकड़े एकत्र कर प्रक्षेपास्त्र को सैन्य उपयोग के लिए तैयार कर लेने की है। इससे धन और समय दोनों की बचत होती है। रक्षा वैज्ञानिकों के मुताबिक निर्भय में सभी मुख्य उपकरण स्वदेशी होंगे। इसमें उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके कारण यह अपनी श्रेणी की किसी भी मिसाइल से कमतर नहीं होगी।
भारत ने अब तक अग्नि, आकाश, पृथ्वी जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास में तो कामयाबी हासिल की है, लेकिन जमीन की सतह से काफी कम ऊंचाई पर चलते हुए लक्ष्य संधान करने में सक्षम क्रूज मिसाइल क्षमता का यह पहला परीक्षण होगा। क्रूज मिसाइलों की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि धरती की सतह पर काफी कम ऊंचाई पर चलने के कारण इन्हें रडार भी नहीं पकड़ पाते।
अप्रैल, 2012 में अग्नि-5 मिसाइल के कामयाब परीक्षण के बाद डीआरडीओ अब तक अग्नि-1, 3, 4 और पृथ्वी श्रेणी की मिसाइलों के आधा दर्जन से अधिक परीक्षण कर चुका है। दो दिन पहले पहली बार पनडुब्बी से नाभिकीय हमला करने में सक्षम बी-05 प्रक्षेपास्त्र का भी परीक्षण कामयाब रहा।
निर्भय एक सब सोनिक मिसाइल है यानी ध्वनि से कम गति पर चलती है .

‘रुद्र’
भारत में ही विकसित और हथियारों से लैस पहला हेलीकॉप्टर ‘रुद्र’ शुक्रवार को देश की थलसेना के हवाले कर दिया गया.थलसेना के पास लड़ाकू हेलीकॉप्टरों का अपना एक बेड़ा है. रक्षा मंत्रालय द्वारा सभी लड़ाकू हेलीकॉप्टरों का नियंत्रण थलसेना को सौंप दिए जाने के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की ओर से थलसेना को दिए जाने वाले 60 हथियारबंद हेलीकॉप्टरों में ‘रुद्र’ पहला है.
थलसेना के उप-प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल नरेंद्र सिंह ने संवाददाताओं से कहा, ‘यह हमारे लिए बहुत अहम प्रणाली है क्योंकि यह हेलीकॉप्टरों का पहला ऐसा प्लैटफॉर्म होगा जो हथियारों से लैस है. किसी भी लड़ाई में जमीनी अभियानों की कामयाबी के लिए गोलीबारी और हवा में चालाकी से पेश आने की काबिलियत होनी चाहिए और जब भी जरूरत हो तो तुरंत मदद देने के योग्य भी होना चाहिए.’ सिंह ने बताया, ‘रुद्र से हमें वह क्षमता हासिल हो सकेगी.’
आर्मी एविएशन कॉर्प्स के मेजर जनरल पी के भराली ने बताया, ‘हेलीकॉप्टरों का पहला स्क्वॉड्रन जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा. हमारे पास 60 हेलीकॉप्टर होंगे और एक स्क्वाड्रन में 10 हेलीकॉप्टर शामिल किए जाएंगे.’ ‘रुद्र’ एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर का ‘एमके-चार’ संस्करण है जिसका डिजाइन और निर्माण एचएएल की ओर से ही किया गया है. यह हथियारों के अलावा हेलीकॉप्टर चेतावनी और जवाबी कार्रवाई करने की कई प्रणालियों से भी लैस है.
एचएएल के अध्यक्ष आर के त्यागी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र की यह सरकारी कंपनी थलसेना की सभी परियोजनाओं को लेकर प्रतिबद्ध है. एचएएल के प्रबंध निदेशक (हेलीकॉप्टर कॉम्प्लेक्स) पी सुंदर राजन ने इस मौके पर ‘रुद्र’ से जुड़े दस्तावेज लेफ्टिनेंट जनरल सिंह को सौंपे. सिंह ने कहा कि चेतावनी और जवाबी कार्रवाई करने की कई प्रणालियों में रेडार लेजर मिसाइल चेतावनी प्रणाली और फ्लेयर शैफ डिस्पेंसर्स शामिल हैं.

ऐब्ब और फ्लो को चांद पर कई गहरी दरारों के सबूत भी मिले हैं, जो वहां मलबों के नीचे पड़े मिले हैं.
ग्रेल मिशन ने अब तक की सभी अंतरिक्ष परियोजनाओं की तुलना में किसी भी ग्रह के सबसे बेहतर क्वालिटी के मानचित्र भेजे हैं जिसमें पृथ्वी भी शामिल है.

उपग्रहों द्वारा गुरुत्वाकर्षण में जिस फर्क को मापा गया है वो चंद्रमा के असामान्य संरचना के बारे में बताती है.

इसके स्पष्ट उदाहरण चांद की सतह पर मौजूद बड़ी पर्वत श्रृंखलाएं और गहरी घाटियां हैं. इतना ही नहीं चांद के भीतरी हिस्से में मौजूद चट्टानों में भी अनियमितता पाई गई है.

हालांकि इन जानकारियों का विशलेषण अभी नहीं किया गया है लेकिन वैज्ञानिकों को चांद के संबंध में कुछ बेहद ही रोचक और नई जानकारियां मिली हैं.

प्रोफेसर मारिया ज़ुबेर के अनुसार, ''जो सबसे महत्वपूर्ण बात हमें पता चली है वो ये हैं कि चांद की बाहरी परत जितना हमने सोचा था उससे कहीं ज्य़ादा पतली है और यहां मौजूद घाटियों के कारण इसका बाहरी आवरण हट गया है. ये सभी तथ्य चांद के साथ पृथ्वी की संरचना को समझने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं क्योंकि हम ऐसा मानते हैं कि पृथ्वी और चांद की संरचना कई मायनों में एक जैसी है.''



सैली राइड

चांद पर नज़र रखने के लिए अंतरिक्ष में भेजे गए नासा के दो उपग्रहों को जानबूझ कर चांद की सतह पर ध्वस्त कर दिया गया है.

'ऐब्ब' और 'फ्लो' नाम के ये अंतरिक्ष यान करीब एक साल तक चांद की परिक्रमा करते हुए उसके गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को मापने का काम करते रहे हैं.

ऐसा उसके आंतरिक हिस्सों के बारे में पता लगाने के लिए किया गया था.

वॉशिंग मशीन के आकार के इन दोनों उपग्रहों ने चांद की शानदार और विस्तृत तस्वीरें खींच कर भेजीं थीं.

लेकिन बाद में इसका ईंधन कम हो जाने पर नासा के वैज्ञानिकों ने इन अंतरिक्ष यान को चांद के उत्तरी ध्रुव के पास के एक चट्टान पर ध्वस्त कर दिया.

जिस जगह पर इस यान को ध्वस्त किया गया है उसे अंतरिक्ष में जाने वाली पहली अमरीकी महिला सैली राइड के नाम पर रखा गया है, जिनकी इस साल की शुरुआत में मौत हो गई थी.

सैली राइड की संस्था ही इन अंतरिक्ष यानों के कैमरे को संचालित कर रही थी.

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The Leonid meteor shower is created by debris from the comet Tempel-Tuttle, which orbits the sun every 33 years. During the closest approach to the sun, the star's heat causes some of the comet’s ice to crumble off, taking some dusty debris with it. Those lanes of debris are what Earth passes through each November to create the Leonids.
November is the time of theLeonid meteor shower, when the meteors come swarming into our night sky view every time the Earth passes through a debris stream from an ancient comet. These ultra-swift light streaks appear to emanate from out of the constellation of Leo (hence the name, "Leonid"), a star pattern that currently  rises in the northeast at 11 p.m. local time, and remains in view for the rest of the night.


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IPv4 and IPv6
IPv4 is a internet protocol which facilitates 4million address at a time to users but now it is not sufficient so that Government of India is using IPv6 protocol to speed up internet and it is more secure than IPv4. It can handle more than 4 million users at a time.
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New Army Chief - General Vikram Singh
BARC/Atomic Energy Comission - R.S.Sinha
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नेरपा 

4 अप्रैल , 2012

भारत ने रूस  से औपचारिक  तौर पर 'नेर्पा' नामक  परमाणु पनडुब्बी 10 वर्ष के लिए  लीज़  पर ली है . 
स्थान- व्लादिवोस्तोक  पोर्ट 
इससे भारत अमेरिका, रूस, चीन , ब्रिटेन , फ्रांस  के उस समूह में शामिल हो गया है जो समुद्र में भी परमाणु हथियार का प्रयोग करने में सक्षम है। 
नौसेना अध्यक्ष- निर्मल वर्मा 
पनडुब्बी का नाम - आई एन एस 'चक्र' 

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अग्नि- IV 

उड़ान- १५ नवम्बर २०११
मारक क्षमता - ,००० किलोमीटर  
निर्माता- DRDO - PROJECT DIRECTOR - TESSY THOMAS " MISSILE WOMAN"
स्थल- व्हीलर द्वीप, ओडिशा
परीक्षण प्रकार- रोड मोबाईल लौन्चर 
वजन- १७ टन
लम्बाई - २० मीटर 
भार वहन क्षमता- ,००० किलोग्राम , हथियार ले जाने में सक्षम, द्विचरण हथियार प्रणाली है जो कि ठोस प्रणोदक से चलती है


अग्नि-III
मारक क्षमता- ,५००-,000 किलोमीटर
ठोस प्रणोदक, द्वि चरण बेलिस्टिक मिसाइल, परमाणु हथियार ले जन में सक्षम 
परीक्षण प्रकार- रेल  मोबाईल लौन्चर 
वजन- ३२ टन
लम्बाई- . मीटर 

अग्नि-II
मारक क्षमता- ,००० किलोमीटर
परिक्षण स्थल - चांदीपुर, ओडिशा  
सतह से सतह मार करने वाली मिसाइल 
परीक्षण प्रकार- रेल  मोबाईल लौन्चर 



अग्नि-V

क्षमता- ,००० किलोमीटर, परमाणु आयुध ले जाने में पूर्णतः सक्षम, अंतर-महाद्वीपीय मारक क्षमता 
परीक्षण- फरवरी,२०१२ में होगा
प्रणोदक- त्रि चरण 
DRDO प्रमुख वी.के. सारस्वत 
4 ELITE GROUPS
  1. NSG- NUCLEAR SUPPLIERS GROUP
  2. MTCR- MISSILE TECHNOLOGY CONTROL REGIME
  3. WA - WASSENAR ARRANGEMENT
  4. AG - AUSTRALIA GROUP 
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आकाश
विश्व का सबसे सस्ता और छोटा टेबलेट पीसी 
सर्कार की तरफ से ५०% की छूट के साथ विद्यार्थियों को उपलब्ध
निर्माता- डाटाविद लिमिटेड कंपनी 
सौर ऊर्जा के प्रयोग से चलता है.
दक्षिण कोरिया, चीन, अमेरिका के सहयोग के साथ ही इसमें १६% कलपुर्जे भारतीय हैं
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SETTELITS


PSLV-C 8  : EZYLE (ITALY) , 2007 - COMPLETELY COMMERCIAL

PSLV-C 9 : 
PSLV-C 10 : TEKSAR (ISRAEL)   

PSLV-C 11 : CHANDRAYAN - I



PSLV-C 18 : मेघा ट्रोपिक्स,१२ अक्तूबर २०११
भारत और फ़्रांस का एक संयुक्त उपक्रम है जिसका निर्माण इसरो द्वारा किया गया है
प्रक्षेपण स्थल- सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र , श्री हरिकोटा, आँध्रप्रदेश 
अन्य छोटे उपग्रह जो इसके साथ छोड़े गए- VESSELSET(LUXEMBOURG), SRMSET(CHENNAI), JUGNU(IIT-KANPUR)
कार्य- भारतीय मानसून का विस्तृत अध्ययन, बाढ़,सूखे, चक्रवात आदि की जानकारी देना.






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भारती 

दक्षिणी ध्रुव - ANTARCTICA 

नेतृत्व - राजेश  अस्थाना 

पूर्व  मिशन  - दक्षिण  गंगोत्री - 1984
                      मैत्री - 1989 

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Sunita Williams, two other astronauts dock with space station



The trio docked its Soyuz TMA-05M spacecraft to the Rassvet module at around 10:21 IST, NASA said in a statement.
The crew took off to the ISS successfully from Baikonur cosmodrome in Kazakhstan on July 15 for a four-month long mission to the space station
This is the second space mission for Sunita Williams. She also holds the record of the longest spaceflight —— 195 days —— for woman space travellers.
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MARS ROVER CURIOSITY - 6 AUGUST , 2012

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