1.25.2013

डेविड हेडली को 35 साल की सजा


मुंबई हमलों के सिलसिले में चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संदिग्ध सदस्य डेविड हेडली को अमरीका की एक अदालत ने 35 साल की सजा सुनाई है.
शिकागो की एक अदालत ने गुरुवार को कड़ी सुरक्षा के बीच ये फैसला सुनाया.
पाकिस्तानी मूल के 52 वर्षीय अमरीकी नागरिक हेडली को एफबीआई ने अक्टूबर 2009 में गिरफ्तार किया था. उन पर 2008 के मुंबई हमलों का षड़यंत्र रचने और उस पर अमल करने के आरोप थे.
मुंबई हमलों में छह अमरीकी नागरिकों सेमत 166 लोग मारे गए थे.
बाद में हेडली ने अपने ऊपर लगे आरोपों को कबूल कर लिया और मौत की सजा न दिए जाने का आश्वासन मिलने के बाद वो अमरीकी सरकार की 'आतंकवाद विरोधी कोशिशों' में मदद करने के लिए सहमत हो गए.

'हल्की नहीं सजा'

हेडली को ये भी भरोसा दिया गया कि उन्हें भारत, पाकिस्तान या डेनमार्क प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा.
अमरीकी स्टेट अटॉर्नी गैरी एस शारिपो ने लश्कर-ए-तैयबा और अन्य चरमपंथी संगठनों के खिलाफ कोशिशों में मदद करने पर हेडली के लिए 30 से 35 साल तक की सजा की मांग की थी.
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार जज हैरी लाइननवेबर ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि जो सजा मैं हेडली को दे रहा है, उसके बाद वो आजीवन जेल में रहेंगे.”
उन्होंने कहा कि मौत की सजा देना कहीं आसान होता, “जिसके लायक आप हो” लेकिन जज ने 35 साल की सजा दी. उनके अनुसार, “ये भी हल्की सजा नहीं है.”
लेकिन जज ने ये भी कहा, “मुझे हेडली की इस बात में कोई भरोसा नहीं है कि वो अब बदल गए हैं और अमरीकी जीवनशैली में उनका विश्वास है.”
नवंबर 2008 में समुद्र के रास्ते मुंबई में दाखिल हुए हथियारबंद चरमपंथियों ने कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया और 166 लोगों की जानें ले ली जबकि हमलों में सैंकड़ लोग घायल भी हुए.
हमलों के दौरान गिरफ्तार इकलौते चरमपंथी अजमल आमिर कसाब को हाल ही में पुणे की यरवदा जेल में फांसी दी गई.

1.08.2013

मॉरीशस के राष्ट्रपति राजकेश्वर पुरयाग की भारत यात्रा


मॉरीशस के राष्ट्रपति राजकेश्वर पुरयाग के पूर्वजों के गांव लोग काफी उत्साहित हैं. रविवार को पुरयाग जब गांव देखने पहुंचेंगे तब ग्रामीणों ने उन्हें उपहार के तौर पर गांव की मिट्टी और धान की बाली देने का फैसला किया है. पटना जिले के पुनपुन प्रखंड के वाजितपुर गांव से राजकेश्वर पुरयाग के पूर्वज 19वीं सदी में मॉरीशस जा बसे थे. प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में भाग लेने के लिए पुरयाग इन दिनों भारत आए हुए हैं.

धान की बाली और स्मृति-चिन्ह भी देंगे
जिले के एक अधिकारी खुर्शीद आलम ने शनिवार को बताया कि राजकेश्वर पुरयाग के वंश परिवार के सदस्यों समेत ग्रामीणों ने उन्हें गांव की मिट्टी देने का फैसला लिया है जिसे वे अपने साथ घर लेते जाएंगे. अधिकारी ने कहा कि गांव के लोगों ने मेहमान राष्ट्रपति को 'धान की बाली' भी देने का फैसला लिया है. इसके अलावा कुछ ग्रामीणों ने चांदी का स्मृति-चिन्ह देने के लिए चंदा भी किया है.

उत्सव जैसा माहौल है गांव में
गांव में रहने वाले राजकेश्वर पुरयाग के दूर के रिश्तेदार महेश महतो ने बताया कि गांव वाले 'माटी के लाल' को 'गांव की मिट्टी' उपहार में देंगे. बिहार के इस गांव में अभी उत्सवी माहौल है. महेश पत्थर तोड़ने की मजदूरी करते हैं. जिले के एक अन्य अधिकारी सुशील कुमार ने कहा कि माहौल उत्सवी है और लोग व्यग्रता से मेहमान राष्ट्रपति की आगवानी की प्रतीक्षा कर रहे हैं. राष्ट्रपति की यात्रा के मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है.

पहले भी यात्रा पर आते रहे हैं 'बड़े लोग'
राजकेश्वर पुरयाग के पूर्वज गिरमिटिया मजदूर के रूप में कैरेबियाई द्वीप समूह के तत्कालीन ब्रिटिश उपनिवेश त्रिनिनाद एवं टोबेगो चले गए थे. पिछले साल जनवरी में त्रिनिनाद की पहली महिला राष्ट्रपति कमला प्रसाद बिसेसर ने बिहार के बक्सर जिले के इतराही स्थित अपने पूर्वजों के गांव भेलुपुर की यात्रा की थी. उसके पड़दादा राम लखन मिश्र 1889 में भेलपुर से विदेश चले गए थे. करीब पांच साल पहले मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने राज्य के भोजपुर जिले में स्थित अपने पूर्वजों के गांव की यात्रा की थी. गन्ने और रबर की खेती में अनुबंधित मजदूर के रूप में मजदूरी करने के लिए बिहार से बड़ी संख्या में लोग मॉरीशस, फिजी, त्रिनिनाद, सुरिनाम, दक्षिण अफ्रीका और अन्य जगहों पर गए थे.