12.10.2012

कावेरी जल विवाद

कर्णाटक और तमिलनाडु  के मध्य कावेरी नदी के पानी को लेकर विवाद का हल कावेरी मोनेटरिंग कमिटी  के निर्णय के बावजूद भी नही ख़त्म हुआ . 

CMC ने कर्णाटक को 12 TMC पानी तमिलनाडु को देने का आदेश दिया था परन्तु CMC के इस निर्णय से दोनों ही राज्य संतुष्ट नही थे। अंततः तमिलनाडु ने उपरी अदालत से निर्णय माँगा। अदालत ने कहा कि कमिटी एक विशेषज्ञ दल से बनी थी अतः उनके निर्णय के ऊपर निर्णय देना अनुचित होगा अतः सम्बंधित पक्ष स्वयं ही यह मामला निपटाएं। 

क्या है कावेरी जल विवाद ?
कावेरी नदी कनार्टक स्थित पश्चिमी घाट की ब्रह्मगिरी पहाड़ी के 'कोडागु' स्थान से निकलती है। कावेरी एक अंतर्राज्यीय नदी है। कर्नाटक और तमिलनाडु इस कावेरी घाटी में पड़नेवाले प्रमुख राज्य हैं। इस घाटी का एक हिस्सा केरल में भी पड़ता है और समुद्र में मिलने से पहले ये नदी कराइकाल से होकर गुजरती है जो पांडिचेरी का हिस्सा है। इस नदी के जल के बँटवारे को लेकर इन चारों राज्यों में विवाद का एक लम्बा इतिहास है। 




कावेरी नदी के बँटवारे को लेकर चल रहा विवाद 19वीं शताब्दी में शुरू हुआ। उस वक्त ब्रिटिश राज के तहत ये विवाद मद्रास प्रेसिडेंसी और मैसूर राज के बीच था। 1924 में इन दोनों के बीच एक समझौता हुआ। लेकिन बाद में इस विवाद में केरल और पांडिचारी भी शामिल हो गए। और यह विवाद और जटिल हो गया। भारत सरकार द्वारा 1972 में बनाई गई एक कमेटी की रिपोर्ट और विशेषज्ञों की सिफ़ारिशों के बाद अगस्त 1976 में कावेरी जल विवाद के सभी चार दावेदारों के बीच एक समझौता हुआ। 

यह समझौता तमिलनाडु के पक्ष में था अतः कर्णाटक ने समझौते का पालन नही किया और तमिलनाडु को ज्यादा पानी देने से इनकार कर दिया। कर्नाटक का तर्क है की कर्णाटक में कृषि पिछड़ी हुई है तथा कावेरी नदी का जायदा हिस्सा कर्णाटक में ही है। तमिलनाडु जहाँ पुरानी व्यवस्था रखना चाहता है वहीँ कर्णाटक ज्यादा पानी तमिलनाडु को देने के पक्ष में नही है। 

- कावेरी नदी पर स्थित प्रमुख नगर एवं बाँध भी देखें . 

No comments:

Post a Comment